Breakup Poetry – Ek wakt tha jab tujhse pyar karta tha – be Motivate

By | August 10, 2018

Breakup Poetry – Ek wakt tha jab tujhse pyar karta tha – be Motivate

The perfect revenge shayari

एक वक्त था जब तुझसे बेइंतिहा प्यार करता था।
एक वक्त था जब तुझसे बेइंतिहा प्यार करता था।
अब तो तू खुद मुहब्बत बन चली आए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता।
अब तो तू खुद मुहब्बत बन चली आए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता।
एक वक्त था जब तेरी परवाह करता था, अब तो तू मेरे ख़ातिर फ़ना भी हो जाए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता।
अब तो तू मेरे ख़ातिर फ़ना भी हो जाए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता।

एक वक्त था जब तुझे हजारों massage लिखा करता था, कि एक वक्त था, जब तुझे हजारों massage लिखा करता था। और कोई काम ना था मेरा। बस दिन भर तेरा last seen देखा करता करता । बस दिन भर तेरा last seen देखा करता अब सुन ले। अब सुन ले कि, अब तो अरसा बीत गया है, visit किये हुए तेरी profile को। अरे अब तो अरसा बीत गया है visit किये हुए तेरी profile को।जा – जा तू 24 घण्टे online रह जाए, मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था।

एक वक्त था, जब तुझसे बिछड़ जाने का डर लगा रहता था। एक वक्त था जब तुझसे बिछड़ जाने का डर लगा रहता था। और तु कहीं छोड़ ना दे इस खयाल भर से सहमा-सहमा सा रहता था। लेकिन अब सुन ले, सुन ले कि इतना ज़लील हुआ हूं तेरी इश्क़ मे,  कि इतना ज़लील हुआ हूं तेरी इन रोज – रोज की छोड़ने – छोड़नो की इन बातो से,  की अब तू एक बार क्या सौ मर्तबा भी छोड़ जाए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था।एक वक्त था जब तुझ बिन एक पल ना रह सकता था ।

एक वक्त था, जब तुझ बिन एक पल ना रह सकता था। बेचैन गुमसुदा सा अकेलेपन से डरता था। बेचैन गुमसुदा सा अकेलेपन से डरता था। लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले कि इतना वक्त बिता चुका हूं इस अकेलेपन मे, अरे अब तो इतना वक्त बिता चुका हूं इस अकेलेपन मे, लेकिन सुन ले अब तो ताउम्र तनहा रहना पड़ जाए, तो फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था।

एक वक्त था जब तुझे कोई छू लेता तो मेरा खून खोल उड़ता। एक वक्त था जब तुझे कोई छू लेता तो मेरा खून खोल उड़ता। और इसलिए कई दफा में इन हवाओं से बेर पला करता था। और इसलिए कई दफा में इन हवाओं से बेर पला करता था। अरे अपने हुस्न के सिवा  कुछ नहीं है तेरे पास अगर। अपने हुस्न के सिवा  कुछ नहीं है तेरे पास अगर। 

If the beauty is all you have then the ugglly is all you are

अगर आपके पास सिर्फ और सिर्फ ऊपर की खूबसूरती और भीतर आपके अंदर कुछ भी नहीं है तो आप भद्दे ही हो

 
अपने हुस्न के सिवा कुछ नहीं है तेरे पास अगर, अपने हुस्न के सिवा कुछ नहीं है तेरे पास अगर। जा – जा तू किसी के साथ हमबिस्तर भी हो जाए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था। अरे अपने हुस्न के सिवा कुछ नही है तेरे पास अगर तो, जा – जा तू किसी के साथ हमबिस्तर भी हो जाए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। इतना गुरुर किया तुमने अपनी इस मिट्टी के जिस्म पर, अरे इतना गुरुर किया तुमने अपनी इस मिट्टी के जिस्म पर। जा ये तेरा जिस्म किसी और का हो जाए, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था। एक वक्त था

एक ऐसा भी दिन था, जब तेरे लिए ख़ुदा से मन्नतें माँगता था, एक वक्त था जब तेरे लिए ख़ुदा से मन्नतें माँगता था। मुझे खुद तो कुछ चाहिए ना था, सिर्फ तेरे लिए अपने ख़ुदा को आजमाता था। अरे मुझे खुद तो कुछ चाहिए ना था, सिर्फ तेरे लिए अपने उस ख़ुदा को आजमाता था। लेकिन अब सुन ले, अब तो ना झुकता हु, ना पूजता हु, ना मानता हूं, किसी को, अरे अब तो ना झुकता हु, ना पूजता हु, ना मानता हूं, किसी को, अब तो भले तू खुद ख़ुदा बन चली आए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था।

बताना तुझे मिल जाये मुझ जैसे कोई ओर अगर, अरे बताना तुझे मिल जाये मुझ जैसे कोई ओर अगर, जा – जा तू अब ओरो को आजमा ले मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था।

एक वक्त था जब तुझे हजारों की भीड़ मे पहचान लिया करता था। हिज़ाब मे होती अगर तो इन आँखों से पहचान किया करता था, हिज़ाब मे होती अगर तो इन आँखों से पहचान किया करता था। अब तो निग़ाहों से ओझल किया है, तुझे कुछ इस कदर, की तेरा चहरा भी मेरे आँखों के सामने आ जाए, तो मुझे फर्क़ नहीं पड़ता। एक वक्त था, जब तुझसे प्यार किया करता था।

खैर, फिर भी करता हूं सुक्रिया तेरा की तुझे खोने से मैंने बहुत कुछ पा लिया है। दर्द, ग़म, नगमे और कुछ video सब मिल गई है मुझे, और इन्होंने तो जैसे गले से लगा लिया है। अब तो मुझे सुनने वाले भी है, चाहने वाले भी है, समझने वाले भी है। अब तो मैं घटिया भी Perform करलू फिर भी सुनने वाले है। लेक़िन सुन ले कि, अब तो इतना बेख़ौफ़ हुआ हूं तेरे इश्क़ मे, की ये सब भी छोड़ जाए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था।

अरे खुद ही में मस्त हो गया है, तेरा आशिक़ इतना, की अब कोई सुनने आए या ना आए फर्क नहीं पड़ता।
खैर चाहता तो नही था, कि तुझे यू बेनकाब करू सबके सामने, लेकिन सुन ले,

एक बेवफा मेरी कलम से बेइज़्ज़त भी हो जाए, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। याद कर वो वक्त जब एक लफ्ज़ नहीं सुन पता था तेरे खिलाफ, और देख यहाँ आ के तेरी तौहीन पे लोग हँस रहे है, लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता।
एक वक्त था जब तुझसे प्यार करता था। 

 

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